आईना मुझसे,मैं आईने से झगड़ता रहा,
मैं उसे झूठ ,वो मुझे सच दिखता रहा,
कब तक उलझता रहेगा बिजली से बादल,
डर डर के परिंदा आसमाँ में उड़ता रहा,
बेचैनी क्या चीज है?भूख किसे कहते है?
एक रईस उस फकीर को पूछता रहा..
ये किस रफ्तार से गुजर रही है जिंदगी,
हर मोड़ पे मुझसे कोई छूटता रहा,
अब मुझे डर नही लगता है मौत से डॉक्टर,
बेखौफ मरीज मुझे ये कहता रहा..
कितने समझौतों पे ढल गया ये दिन,
श्याम तक आंख से सुर्य उतरता रहा...
~दत्ता...


