सूखे दरख़्त भार कब तक सह पाएंगे,
ज्यादा आजमाओगे तो टूट जाएंगे
ये मुसाफ़िर हैं इन्हें जाने दो,
ज्यादा तशद्दुद करोगे तो लौट जाएंगे
मत कहना किसी से कि मेरे हुजरे मे भी दिल है,
इश्क वाले आएंगे और लूट जाएंगे
हवा पानी सूरज सब उस तरफ़ है,
शिकायत करोगे तो सांसे रूठ जाएंगे।
