पास होती तो मैं जताता


तू कितनी सुन्दर लगती है


माथे को चूमकर,

बाहों में समेटकर

और मैं बताता,

यहां एक बिंदी भी लगती है


लब से न कुछ कहे जाते

कानो से न कुछ सुना जाता


आंखों आंखों में बातें होती

सांसों से सुन लेते


पास होती तो मैं जताता

तू कितनी सुन्दर लगती हैं