ना जाने किन बेचैनियो से गुजर रहा हूं मैं
खुद को खुद से ही शायद खो रहा हूं मैं
नम आंखों के साथ दिन तो गुजर रहा है
लेकिन रात रात भर तड़प रहा हूं मैं
आंसू बहाना नहीं सीखा मैने
इसी का कीमत शायद चुका रहा हूं मैं
खुद को खुद से ही शायद खो रहा हूं मैं


मैं रो रहा हूं उनके बिछड़ने के ख्याल से
जो अभी अभी तो आए है
मैं रो रहा हूं उनके ख्याल से
जो कभी आए ही नहीं
यूंही अपनो से दूर हो रहा हूं
खुद को खुद से शायद खो रहा हूं मैं।