
क्या कभी सोचा है
ज़रा भी तुमने
सुरज जलता है
पर चांद नहीं
हवाएं चलती है
पर दिखती नहीं
किनारों पर लहरें आती है
पर ठहरती नहीं
पेड़ जीतें है
पर चलते नहीं
बादल गरजते हैं
पर कड़कते नहीं
सुब
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क्या कभी सोचा है
ज़रा भी तुमने
सुरज जलता है
पर चांद नहीं
हवाएं चलती है
पर दिखती नहीं
किनारों पर लहरें आती है
पर ठहरती नहीं
पेड़ जीतें है
पर चलते नहीं
बादल गरजते हैं
पर कड़कते नहीं
सुब