नन्ही परियां
जब खेत में
बोझ उठा कर
चलती तो,
जाने कितना
सारा बोझ
मेरे सर चढ़ता हैं
बस्ता और कलम
जिन हाथों में नहीं
उनको देख मैं
अनपढ़ लगता हूँ
वो धूप देख समय बताती
बोझ उठा कर भार बताती
गुट्टा गिनती कर
मुझे हिसाब सीखाती
मैं मशीन का सहारा लेता हूँ ,
तब जीता हूँ.....


