कुंवारे स्नेह मुसकाते,
स्वीकार करनेवाले कुमार
एक ब्याहता का प्रेम
कैसे करोगे स्वीकार
जानते हो कुँवारा स्नेह
झरने की तरह होता है
कभी कभी मौसम आए
तो झरता है
मगर इस ब्याहता हृदय के जलनिधि में
तुम्हारी यादों के मोती बिखरे हैं
और गहरी पैठ की,
तैराकी किसे आती है तुम्हारे सिवा
अब संकोच मत करना ,
मेरे मन के मोती स्वीकार करना


