कोई पा कर खुश तो कोई खो कर खुश है

कोई हंस कर गमज़दा कोई रो कर खुश है


फिर उम्मीद मेरी डगमगाई दिल की आज

मेरे अपने , गैरों से दिल लगा कर खुश है


दूर तक अंधेरे है चराग जलाकर रखना

ये दिलजले अपना दिल जलाकर खुश है


गुज़रते ये लम्हे खामोशी से बोझिल है

दर्द गाती तन्हाई, गीत सुना कर खुश है


गीत, गज़ल, फसाना बना इश्क़ उनका

जो सनम किसी और के बन कर खुश है


सोचता हूँ चुप रहूँ या कह दूँ हाले दिल

लेकिन हम अपनी कश्ती डुबोकर खुश है