मिल जाते हैं कुछ बिछडे़ पल,
जब स्वर्णिम अतीत के पन्ने पर
धूल फिर यादों की हो तो ,
आंचल से पोछ लिया करते हैं
फिर ना समय बितता ना बैठता है
जाने कितने चलचित्र सजाता है
आह !मेरे अतीत के पन्ने


मिल जाते हैं कुछ बिछडे़ पल,
जब स्वर्णिम अतीत के पन्ने पर
धूल फिर यादों की हो तो ,
आंचल से पोछ लिया करते हैं
फिर ना समय बितता ना बैठता है
जाने कितने चलचित्र सजाता है
आह !मेरे अतीत के पन्ने