अर्धनिर्मित यह स्वप्न
जब हृदय को छलने लगते हैं
तब मैं तूलिका लेकर जाने क्या रचना चाहूँ
मन की पीड़ा को
जब सह नहीं सकते हैं
तब अधरों को कोई गीत गुनगुनाता पाऊँ
आशंकित मन होता है
मैं मिट्टी की रचना हूँ तो,
सावन भादों में कैसे मल्हार राग सुनाऊँ


अर्धनिर्मित यह स्वप्न
जब हृदय को छलने लगते हैं
तब मैं तूलिका लेकर जाने क्या रचना चाहूँ
मन की पीड़ा को
जब सह नहीं सकते हैं
तब अधरों को कोई गीत गुनगुनाता पाऊँ
आशंकित मन होता है
मैं मिट्टी की रचना हूँ तो,
सावन भादों में कैसे मल्हार राग सुनाऊँ