आईने से नजर हम चुराते रहे ।
रौशनी -रौशनी से छिपाते रहे ।
निकट है मेरे आसमां सोचकर ,
दोस्ती पर्वतों से बढा़ते रहे।
अंधेरा न हो उसकी गली में कभी
यही सोच अपना दिल जलाते रहे।
एक सहरा ने लब सी लिए प्यास से
और बादल थे दरिया भिगाते रहे।
सुमन वो बहुत दूर था फिर भी हम ,
प्यास किरनों से अपनी बुझाते रहे।


