
आईने से नजर हम चुराते रहे ।
रौशनी -रौशनी से छिपाते रहे ।
निकट है मेरे आसमां सोचकर ,
दोस्ती पर्वतों से बढा़ते रहे।
अंधेरा न हो उसकी गली में कभी
यही सोच
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आईने से नजर हम चुराते रहे ।
रौशनी -रौशनी से छिपाते रहे ।
निकट है मेरे आसमां सोचकर ,
दोस्ती पर्वतों से बढा़ते रहे।
अंधेरा न हो उसकी गली में कभी
यही सोच