चलो ना , मन को बुद्धु बनाएँ
तनावों से दूर फिर बच्चा बन जाएँ
भर जेबों ढेर ठहाके.....
"अबे" ......"ओए" ... से दोस्त बुलाएँ
बिन कारण ही दौड़े भागें
और घुटनों पर चोट लगाएँ
फटे गाल और छिली कोहनियां
लो फू फू करके भूल भी जाएँ
लो आज फिर बच्चा बन जाएँ
ढिली ढिली निक्कर से
छितरी बिखरी चोटी से
आँख दबाते कंचों से
अनगढ पत्थर पिठ्ठु से
उन बिन पहियों की कारों से
टूटी फूटी गुडिया से
लो करे दोस्ती फिर बच्चा बन जाएँ
कच्ची पक्की की गर्म भाप में
नकली चेहरों को पिघलाएँ
चलो ना,मन को बुद्धु बनाएँ
आज फिर बच्चा बन जाएँ