रोज़ ही आँखों से
बहना तेरा।
फ़िर भी दिल में बाक़ी
बचे रहना तेरा।
............................................................
हर दिन
तुझ पर यकीं
दुर्ग की प्राचीरों सा,
हर रात रेत की दीवारों सा
ढहना तेरा।
रोज़ ही आँखों से
बहना तेरा.....।
..........................................................
चलूँ तो
फिसल जाऊँ डग में,
लौटूँ तो
लिपटी आती हो पग में,
चिकनी मिट्टी के टीलों पे
रहना तेरा।
रोज़ ही आँखों से
बहना तेरा
फिर भी दिल में बाक़ी
बचे रहना तेरा।
........................................................
कुछ बिका
मुफ़लिसी में,
कुछ बिका
बेबात में,
कुछ बिक गया
एकमुश्त,
कुछ बिका
बार-बार में,
पलकों में छुपा कर
बचा लिया बस
मोती का गहना तेरा।
रोज़ ही आँखों से
बहना तेरा
फिर भी......।
..................................................
न पाया कभी
पल छिन
तुझे मैंने
फिर किस तरह खोया
हर दिन
तुझे मैंने,
इश्क और ईश्वर
तर्क से परे हैं शायद,
सच ही था
कहना तेरा।
रोज़ ही आँखों से
बहना तेरा
फ़िर भी दिल में
बाक़ी बचे रहना तेरा।


