
बेटे भी आजकल विदा ही हो जाते हैं
दे कर माँ बाप को एक कागज़ का टुकड़ा,
जिस पर लिखा होता है एक फोन नंबर।
जल्दी जल्दी घर आने की एक दिलासा,
और सेट होते ही अपने पास बुला लेने का एक आशा।
वो कमरा अब अक्सर खाली रहता है
बस दीवारों पर चिपके तेंदुलकर और ब्रूस ली
आपस में बतिया लेते हैं कभी।
हिन्दी और इंग्लिश गानों की कैसेट्स
जिनसे चिढ़ कर माँ फेंक देने की धमकी देती थीं
आज भी बाकायदा साफ़ होती हैं कपड़े से।
घर में सालों से रखे हैं अब भी
स्टोर रूम में एक बैट और
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