पवन ने कहा सौंप दो मुझे अपना सब सत्व तमस व रजत चाहती हूँ मैं स्वयं से जोड़ना तुमको यही होगी गति उत्तम शब्द सार्थक नियति उत्तम किन्तु मुझे करना क्षमा तुम मैं रहूंगी – वहीं अपने चन्दन वन में बहूँगी वहीं तुम्हारी धरती पर आ नहीं सकती अभी मैं कभी मैं किन्तु फिर भी मैं सदा उत्सुक हूँ तुमसे सहज व्यापार हेतु प्यार हेतु!