माँ
पालती है
पेड़ एक
लाड से
प्यार से
दुलार से
माँ सुलाती है
लोरी गा
पिलाती है दूध
लुटाती है
तन मन प्राण
पेड़
होता बड़ा ज्यों-ज्यों
जड़े
उसकी मजबूत
घुस जाती है
माँ में
हाथ पैर में
दिमाग में
और दिल में
चूंसता है
खून-पानी-
माँस
मँहगे आँसू
पेड़ पाता
विस्तार अदभुत
देखता संसार
रूककर राह में
कितना बड़ा है पेड़
कितना लम्बा है पेड़
पेड़ बढ़ता
निस दिन
माँ से धँसी
जड़ों से
दूर होता
निस दिन....!!!साभार (From Dr. Kumar Vishwas's Facebook Page)