मेरा तन बे:हवा, पर साँस हूं में।
हाँ, एक जिंदा लाश हूं में।।
वक्त के गहरे घावों ने, मुझे भी तड़पाया था।
जीने की बेबस चाह ने, मुझे भी रुलाया था।।
पर फिर से जीने की आस हूं में।
हाँ, एक जिंदा लाश हूं में।।
गिरते, पड़ते हुए संभलने का खुमार सा छाया था।
रास्ते के पत्थरों में भी, प्यार सा समाया था।।
कभी ना बुझने वाली प्यास हूं में।
हाँ, एक जिंदा लाश हूं में।।
तू आई तो दीवाली सा रोशन नज़ारा था।
फिर क्यों बेवफाई का पत्थर मुझ पर मारा था।।
सात जन्मों का साथ हूं में।
हाँ, एक जिंदा लाश हु में।।