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रोटी का टुकड़ा

रोटी का इक टुकड़ा लिए,

भाग रहे थे, श्वान महोदय!

डंडा लिए पीछे, था इंसान,

डर उससे भाग रहे थे श्वान!


मारा डंडा जा लगा श्वान के,

मुख से टुकड़ा गिरा श्वान के!

श्वान चिल्लाते भाग गया था,

यूँ मार खा के भाग गया था!


तभ

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