कलियाँ खिले और चमन निशात हो जाए,
आओ, आज तुम से तुम्हारी बात हो जाए।
इन रेगज़ारों में जाने कब बरसात हो जाए,
आओ, आज तुम से तुम्हारी बात हो जाए।
आँखों में बसे आँसू कब जज़्बात हो जाए,
आओ, आज तुम से तुम्हारी बात हो जाए।
चमकता आफताब ढले और रात हो जाए,
आओ, आज तुम से तुम्हारी बात हो जाए।
तुम्हारी ये नज़र तो मेरी क़ायनात हो जाए,
आओ, आज तुम से तुम्हारी बात हो जाए।
कब, बिछुड़े आ मिले, और साथ हो जाए,
आओ, आज तुम से तुम्हारी बात हो जाए।


