हेत प्रेम सूं बहन बांधती
एक फूंदो दो राखड़ल्यां
डोरो काचो प्रेम इत्तो हो
बहनां खातर जी मरल्यां
गळै लाग अर रोवण लागी
बात करे वे अणबोल्या
पैली कतरी मन भाती ही
बे मोरां री पांखड़ल्यां
सुविधा कम पण सुख देती ही
बे झूंपा अर झूंपडल्यां
परणीज्या पाछै आज मिलेला
वे बालपणै री साथण्या
टाइम बदळग्यो सोच बदळगी
बात कड़ी पण मन धर ल्यां
आज सबां री आई सोच है
पैली अपणों घर कर ल्यां
"शक्ति" ध्यान राख अर करजे
ए मीठी करड़ी बातड़ल्या
✍️ दशरथ रांकावत 'शक्ति'
