
"समा नहीँ सकते संपूर्ण ज्ञान को अपने में
तो श्रेष्ठ होने का अहँकार जला डालो
प्रकृति का योग है बदलाव की धारा
अपने इस सुख के ठहराव को बदल डालो
प्रकाश नहीँ देता दीपक जले बिना
परिश्रम का ये सूर्य चमका डालो
नदी खो देती है दिशा बहाव का
अपने इन किनारो को रोके डालो
होता नहीँ कुछ समय के बिना पूर्व
इस उत्सुकता का रथ बदल डालो
कुछ संभव नहीँ बिना ऊर्जा बिना भाव के
Read More! Earn More! Learn More!
