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एक sher


न जाने पत्थरों ने कैसा जादू कर दिया वासिफ़ ।गले से मुस्कुरा कर शीशे भी अब उनसे मिलते हैं ।।

©डॉ वासिफ़ काज़ी, इंदौर©काज़ी की कलम

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