गुजरा वक्त गुजर नहीं रहा

इस वक्त गुजरा वक्त ही गुजार रहा हूं

अब तू मेरी महबूबा नहीं

फिर भी तेरी ही मोहब्बत में जी रहा हूं

मालूम है कि अब तू नहीं आएगी

फिर भी तेरे इंतजार में ही जी रहा हूं

वक्त गुजर गया तो क्या हुआ

तू मेरे लिए गुजरा जमाना नहीं

माना कि तेरे मेरे बीच अब कोई फसाना नहीं

फिर भी क्यों लगता है तेरे बिन ये जमाना नहीं

----- तेजेंद्र शिव -------