सिलसिला ए मोहब्बत तू शुरू कर

सिलसिला ए चाहत तू शुरू कर

सिलसिला ए इबादत तू शुरू कर

ना उम्मीदों में भी तू उम्मीदें देखना शुरू कर

यह दौर है जालिम तू घर में ही रहना शुरू कर

ऐ इंसा तू खुद पर ही रहम कर

तेरे चाहने वालों की तू फिक्र कर

गुजर जाएगा यह दौर जालिम

तू इंसा है इंसा से खिलाफत न कर


-------- तेजेंद्र शिव --------