जमी नहीं हमारी आसमां नहीं हमारा
हमें तो इंसा होना भी मयस्सर नहीं
चाहत तो है बागों में फूल खिलाने की
चाहत तो है बागों में खिले फूलों को महकाने की
लेकिन इस हवा में सांस लेने की हमें इजाज़त नहीं
चाहत तो है सारा जहां रोशन करने की
लेकिन एक चरागा जलाने की हमें इजाजत नहीं
-------- तेजेंद्र शिव -------


