" बड़े अजीब है मेरे मुल्क के सियासत दान "
बड़े अजीब है मेरे मुल्क के हुक्मरान
बड़े अजीब है मेरे मुल्क के सियासत दान
सियासत के लिए लोगों की जिंदगी दांव पर
सियासत के लिए और पता नहीं क्या-क्या दांव पर?
ये सियासत दानों की सियासत है या जालिमों का जुल्म ?
बड़े अजीब है मेरे मुल्क के मीडिया के लोग
इन्हें फक्र है सच दिखाने का
मौत भी है जिंदगी का आखरी सच
इन्हें फक्र है मौत का सच दिखाने का?
जब मौत ने किया था आगाह
तब बता रहे थे कौन सा सच??
बड़े अजीब लोग हैं मेरे मुल्क के
पता नहीं क्या क्या लगा है इनका दांव पर??
चारों तरफ हाहाकारऔर मौत का तांडव
कोई समझता क्यों नहीं?
मुल्क के लिए क्या है जरूरी?
हजारों जानें जाने लगी हैँ कोरोना के मार्फ़त
इन हुक्मरानों को थी नहीं इलेक्शन से फुर्सत
इंसान हो इंसान की जिंदगी बचाओ
इंसान हो इंसानियत का फर्ज निभाओ
क्यों कर रहे हो कालाबाजारी?
क्या नहीं सबकी जिंदगी प्यारी?
इंसान हो इंसानियत का फर्ज निभाओ
मासूमों की जिंदगी बचाओ
यह दौर है जालिम गुजर जाएगा
इंसान को इंसानियत का सबक सिखा जाएगा
----------- तेजेंद्र शिव ----------


