ऐ खूबसूरत जिंदगी मैं तुझे पुकार रहा हूं
ऐ खूबसूरत जिंदगी मै तुझे आवाज दे रहा हूं
तू दूर न जा!
इंसान ने छोड़ी नहीं है अभी उम्मीद जीने की
सदियों से इंसान जी रहा है
मौत का क्या? वह तो गुलाम है
कभी तानाशाहों की कभी युद्धों की कभी बीमारियों की तो कभी महामारियो की
अभी तो जीना है इंसान को सदियों
अभी तो पढ़ना है शेक्सपियर के नाटकों को
अभी तो पढ़ना है गालिब की नज्में
और सीखनी है कबीर की बातें
अभी तो करना बहुत काम है बाकी
टैगोर भी तो छूटे हैं अधूरे
प्रेमचंद के ख्वाब भी करने हैं पूरे
अभी तो देखना है इंसान को बहुत से सबेरे
अभी तो समझना बाकी है आइंस्टाइन को
जो है प्रकृति के कुशल चितेरे
ऐ खूबसूरत जिंदगी तू दूर न जा
चांद और मंगल पर तो इंसान अभी सिर्फ पहुंचा है
वहां तो जिंदगी बसाना है अभी बाकी
दुनिया को और खूबसूरत बनाना है अभी बाकी
दुनिया को और महकाना है अभी बाकी
ऐ खूबसूरत जिंदगी तू दूर न जा
इंसान को अभी और जीना है
समंदर पार भी जाना है
समुंदर के भीतर भी जाना है
इंसान को अभी और नया इंसान बनना है
अभी तो बहुत से राज बहुत से रहस्य जानना बाकी है
दुनिया को और खूबसूरत बनाने का मकसद अभी भी बाकी है
ऐ खूबसूरत जिंदगी तो दूर न जा
ऐ खूबसूरत जिंदगी तुझे लाख-लाख सलाम हैं
तू तो इंसान के लिए उम्मीदों का एक खूबसूरत पैगाम है
तेजेंद्र शिव


