
"जगत जननी "
हे जगत जननी महाजननी ,
आज तू कल्याण कर ,
इस देश इस विश्व ,
आज तू कल्याण कर।
हो सत्य का पथ यूं प्रदर्शित ,
जैसे रवि का तेज हो ,
चारों तरफ हो प्रेम पुलकित ,
मन में न भाव कुलषित एक हो।
कर रहे आवाहन तेरा माँ ,
कर के तेरी माँ वंदना ,
आज काली रूप तू पु
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