"जगत जननी "


हे जगत जननी महाजननी ,

आज तू कल्याण कर ,

इस देश इस विश्व ,

आज तू कल्याण कर। 


हो सत्य का पथ यूं प्रदर्शित ,

जैसे रवि का तेज हो ,

चारों तरफ हो प्रेम पुलकित ,

मन में न भाव कुलषित एक हो। 


कर रहे आवाहन तेरा माँ ,

कर के तेरी माँ वंदना ,

आज काली रूप तू पुनः अवतार ले ,

हे जगत जननी महाजननी आज तू कल्याण कर। 


वासना के रक्तबीजों ने मचायी त्राहि है ,

पुरुष प्रधान समाज में रोज निर्वस्त्र होती नारी है ,

आज चण्डिका रूप में तू पुनः अवतार ले ,

 कर रक्तबीजों का रक्तपान तू अभय दान दे। 


हे जगत जननी महाजननी आज तू कल्याण कर ,

इस देश का इस विश्व का आज तू नवनिर्माण कर।