साक़ी-ए-मयख़ाना…'s image
Poetry1 min read

साक़ी-ए-मयख़ाना…

Dr. SandeepDr. Sandeep December 16, 2021
Share0 Bookmarks 50273 Reads4 Likes

साक़ी देख ज़माना कैसी तोहमत लगाता है

आँखें तेरी नशीली पर शराबी मुझे बताता है..

मैं तो सिर्फ़ तेरे तसव्वुर का बहाना ढूँढता हूँ

पर वो मुझे शराबी कहकर मेरा पीना छुड़ाता है..

कहने को तो यहाँ हर कोई लगता बहुत प्यासा है

पर मेरे ही पीने पर ना जाने क्यों शोर मचाता है..

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts