सज्दा करने गया था पर तेरी इबादत सी हो गई
तुझसे बात करते-करते अब तेरी आदत सी हो गई
तुझको खोने के डर में पाने की चाहत सी हो गई
और तेरे सज्दा-ए-इश्क़ पर मुझे इरादत सी हो गई
तेरा चेहरा देखते ही दिल को सआदत सी हो गई
पर तेरे चाहने वालों से बे-वजह अदावत सी हो गई
दिल के ज़ख़्मों से खुशियों की शहादत सी हो गई
राह-ए-इश्क़ पर चलते-चलते थोड़ी हरारत सी हो गई
पर आगोश में सर रखते ही कुछ शरारत सी हो गई
उस रात की मुलाक़ात में जैसे क़यामत सी हो गई
अब रह लेंगे ख़ुशी से हम ऐसी नफ़ासत सी हो गई
जब ये एहसास आ जाएँ मानों शराफ़त सी हो गई..!!
#तुष्य


