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सफ़र-ए-ज़िंदगी...

ज़िन्दगी के सफ़र में कोई डेरा नहीं मेरा

गली गली घूमता हूँ कोई मिला नहीं मेरा..

शिद्दत-ए-आवारगी तो ज़िंदगी भर चली

नहीं बना मोहब्बत का बसेरा कोई मेरा..

मैंने उसको चाहा था ख़ुदा से भी ज्यादा

आज उसकी नज़रों में कोई साया नहीं मेरा.. 

कभी प्यार में जुद

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