लफ़्ज़ दिल से...
जज़्बात तेरे मेरे काग़ज़-ए-बे-रंग को निखार देते हैं
दिल-ए-मुज़्तर को उम्मीद-ए-बहार से सँवार देते हैं..
लफ़्ज़ तेरे मेरी सहव-ए-क़लम को सुधार देते हैं
हालात-ए-ज़िंदगी पर लिखे शब्दों को उभार देते हैं..
अल्फ़ाज़ तेरे मिजाज़-ए-इश्क़ को लज़ीज़ बना देते हैं
फीक़े पड़ चुके अरमानों में जोश-ए-जुनूँ बढ़ा देते हैं..
दर्द तेरे इन आँखों में तिफ़्ल-ए-अश्क ला देते हैं
सियाह रातों में मेरी आँखों से नींदें उड़ा देते हैं..
मुस्कान तेरी बेजान शाख़ों पर फूल खिला देते हैं
तकलीफ़-ए-ज़िंदगी में भी जीना सिखा देते हैं..!!
#तुष्य
काग़ज़-ए-बेरंग: रंगहीन कागज, दिल-ए-मुज़्तर: अशांत ह्रदय, उम्मीद-ए-बहार: वसंत की आस, सहव-ए-क़लम: लेखनी-भ्रम, जोश-ए-जुनूँ: दीवाना पन, तिफ़्ल-ए-अश्क: आँसुओं की बूंदें



