आज फिर चेहरे पर उसके शादाब देखा

खुली निग़ाहों से दिलकश ख़्वाब देखा..

थम गया नज़र में मेरी ये मंज़र सारा

जब सड़क पर चलता नूर-ए-महताब देखा..!!


वो ख़्वाब की ताबीर है या ख़्वाब क्या पता

मैंने तो अपने धड़कते दिल को बेताब देखा..

क़यामत है गुलाब से लबों पर हंसी उसकी

आज अदा-ए-हुस्न को जो बे-हिजाब देखा..!!


उगते सूरज सा दमकता है चेहरा उसका

जैसे बंद कमरे में मानो आफ़ताब देखा..

मेरे अंधेरे दिल को रोशन कर दे एकबार

जिंदगी में संदीप बहुत ग़म-ए-सैलाब देखा..!!