लब-ए-ख़ामोश से जो अफ़साने बयाँ न हुए कभी
आईना-ए-निगाह दिल के सारे फ़साने कह गए
अगर तुम न बताना चाहो तो मत बताना किसी को
निग़ाहों से बहते अश्क़ सारे किस्से पुराने कह गए
दोस्त हम अज़नबी ही सही मगर दुआ देंगे तुम्हें
समेट लेंगे अश्कों के क़तरे जो सिरहाने बह गए..!!


