मेरी ख़्वाहिश ही न थी ढूढ़ने कीमुझ में ही खोया था मेरा वज़ूदजब भी निकला ख़ुद की खोज़ मेंढूंढता रहा अंदर ख़ुद को रोज़ मैं..!!#तुष्य
मेरी ख़्वाहिश ही न थी ढूढ़ने कीमुझ में ही खोया था मेरा वज़ूदजब भी निकला ख़ुद की खोज़ मेंढूंढता रहा अंदर ख़ुद को रोज़ मैं..!!
#तुष्य