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कहाँ हो राम...

मैं अज्ञान के अँधेरों से घिरा हुआ हूँ, मुझे अँधेरे से उभारो राम..

जैसे अयोध्या को रोशन किया, मेरा भी घर-बाहर संवारो राम..

दुखियों के तुमने आँसू पोंछे, मेरे ग़म के आँसू मिटा दो राम..

दुनिया को जीने की कला सिखाई, मुझे भी जीना सीखा दो राम..

कहाँ खो गया हूँ पता नहीं, मुझे खुद को खुद से मिलवा दो राम..

अँधेरे की क

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