दुआ है मेरी ये दर्द तुम्हारा ख़त्म हो जाए

चाहे हर बार दर्द से मेरी आँखें नम हो जाए..

रखूँगा नफ़ासत से तेरी हिफ़ाज़त भी करूँगा

चाहे मेरे जिस्म पर कितने भी ज़ख़्म हो जाए..

इन होठों पर ये मुस्कान हमेशा खिलाए रखूँगा

चाहे मेरे चेहरे पर कितनी भी शिकन हो जाए..

तुम हाँ बोलो हाथ पकड़ ले चलूँगा वादा है मेरा

चाहे तेरे मोहल्ले में कितने भी फ़ितन हो जाए..

रखूँगा राज़ सीने में किसी से नहीं बयाँ करूँगा

चाहे मेरी जिंदगी की शाम क्यों न दफ़न हो जाए..!!

#तुष्य

फ़ितन: दंगे