जिस रात ख़्वाबों में तेरा दीदार हो जाता है

उस रात को सोना वाकई दुश्वार हो जाता है..

यार ये तेरा कैसा सुरूर है ये कैसा प्यार है

मेरी आँखों में न नींद है न दिल में क़रार है..

तेरी झलक पाने को मैंने ज़िंदगी दी गुज़ार है

मुझ पर चढ़ा कुछ इस तरह तेरा ही ख़ुमार है..

तेरी एक आवाज़ सुनने को ये दिल-ए-बेक़रार है

अब सहरा-ए-ज़िंदगी में एक तलाश-ए-दियार है..

इस आलम-ए-दुनिया का कुछ ऐसा ही शि'आर है 

तेरे जाने से अब मेरी पूरी दुनिया हुई बेज़ार है..

पर मुझे आज भी तुम से उतना ही प्यार बेशुमार है..!!

#तुष्य