इंसान की रूह में जब विराग आ जाता है
तब उसके दिल में भी दिमाग़ आ जाता है..
जिस चाँद से कभी मोहब्बत की करते थे बातें
उस माहताब में भी नज़र दाग़ आ जाता है..
ख़ूबसूरती नहीं दिखती अब चाँद की उसको
ज़ुल्फ़ों में भी नज़र ज़हरीला नाग आ जाता है..
यार संदीप अब इश्क़ पर नहीं रहा कोई एतिबार
अब तो उनकी नज़रों में भी इंतिख़ाब आ जाता है..!!


