जब से देखा है ज़िंदगी को इतने पास से
तमाम चेहरे लगने लगे हैं बहुत ख़ास से
पर मैं अब अपना ही चेहरा छिपाता हूँ
चेहरे पर चेहरा चढ़ा सबको दिखाता हूँ
जिस आईने में दिखता हूँ उसे ही हटाता हूँ
अब सिर्फ़ तुम्हारे मुताबिक़ ही नज़र आता हूँ..!!
#तुष्य


जब से देखा है ज़िंदगी को इतने पास से
तमाम चेहरे लगने लगे हैं बहुत ख़ास से
पर मैं अब अपना ही चेहरा छिपाता हूँ
चेहरे पर चेहरा चढ़ा सबको दिखाता हूँ
जिस आईने में दिखता हूँ उसे ही हटाता हूँ
अब सिर्फ़ तुम्हारे मुताबिक़ ही नज़र आता हूँ..!!
#तुष्य
