हवा गुम, मौसम नम, क़दम थम, ख़ामोश आवाज़ है
जानता हूँ अभी तक तबीयत तुम्हारी कुछ नासाज़ है
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बेशक ख़ुदसे दूर किया तुमने पर दिल नहीं नाराज़ है
हरदिन तेरेलिए करता है दुआ मेरा दिल-ए-फ़य्याज़ है
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जी रहा हूँ बिन तेरे ज़िंदगी मुझपर तबस्सुम-साज़ है
खल रही है तेरी कमी दिल देता तुझे रोज़ आवाज़ है
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एहतराम करता हूँ पर ज़वाब नहीं देना तेरा अंदाज़ है
पर मुझे सब है पता यारा तेरा दिल मेरा ग़म्माज़ है
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पत्थर सी न हो सख्त रक़्स-ए-ज़िंदगी न उम्रदराज़ है
तू है आज भी मेरी अज़ीज़ ये मेरी रूह की आवाज़ है
#तुष्य



