जब वो माथे को चूमने के लिए पैरों को उठाती है
दोनों हाथ कंधे पर रख प्यार से लिपट जाती है..
---
सीने पर कान रख जब वो धड़कनों को बढ़ाती है
दिल से आती आवाज़ में अपना ही नाम पाती है..
---
मैं जब जाने लगता हूँ तो वो हाथ पकड़ मनाती है
नज़रों से होते हुए सीधा मेरी रूह में उतर जाती है..
---
ख़ुशबू उस के जिस्म की मेरी ज़िंदगी महकाती है
गुज़रें हुए लम्हों की यादें हर वक़्त झिलमिलाती हैं..
---
मैं तूझसे प्यार करता हूँ बस यही आवाज़ आती है
ख़ामोशी भरे लबों पर दास्तान-ए-इश्क़ गुनगुनाती है..!!
#तुष्य


