मेरे सारे ख़्वाब अभी मेरी आँखों में सोए हुए हैं..
किसी के आलम-ए-तसव्वुर में खोए हुए हैं..
एहसासों को अश्क़ों के मोतियों से पिरोए हुए हैं..
उनके ख़्यालों में इन पलकों को भिगोए हुए हैं..
ख़्वाहिशों का ख़ून कर हाथों को धोए हुए हैं..
अपने अरमानों की लाश को कँधों पर ढोए हुए हैं..
बिन पिए उनके ख़ुमार में ख़ुद को ऐसे डुबोए हुए हैं..
कि अपने ही अल्फ़ाज़ों को नज़्मों में पिरोए हुए हैं..
फिर दिल की बंज़र जमीं पर इश्क़ के बीज बोए हुए हैं..
और उसके दरख़्त में तब्दील होने के सपने संजोए हुए हैं..!!
#तुष्य



