जनता का है राज यहां पर, गली-गली खुशहाल है।
ठुकी गरीबों के पांवों में, प्रजातंत्र की नाल है।।
चौराहों पर नेताओं की दादुर जैसी तान है।
मेरा देश महान है।
उल्लू यहां प्रकाश बांटते, सूरज का उपहास है।
गहन अंधेरा नयन-नयन में करता यहां निवास है।।
दलालों के घर यहां पहुंचता सरकारी अनुदान है।
मेरा देश महान है।
खद्दरधारी जीव यहां पर, हर प्राणी को खा रहा।
किंतु अहिंसा की परिभाषा माइक पर चिल्ला रहा।।
मगरमच्छ का यहां हो रहा देवों सा सम्मान है।
मेरा देश महान है।
भ्रष्टाचारी यहां लबादा ओढ़े हैं ईमान का।
बंदूकों की नोक बताती यहां मूल्य इंसान का।।
गाया जाता यहां प्रेम से जोंकों का बलिदान है।
मेरा देश महान है।
नीर-क्षीर का ज्ञान यहां पर कौओं के अधिकार में।
समझे जाते हंस यहां पर बुद्धू हर व्यापार में।।
शहीद वीर नारायण सिंह से बड़ी यहां गद्दारों की शान है।
मेरा देश महान है।
नहीं आ रही किसी दिशा से सूरज की आवाज है।
यहां अंधेरे के माथे को मिला अनोखा ताज है।।
लगता है तिनके-तिनके पर बिखरी हुई मसान है।
मेरा देश महान है।


