इन्टरनेट दुनिया  की भी क्या रानाई है।

यहाँ रहनुमाओं में भी नहीं कोई बिनाई है।।

निस्बत-ए-ख़ास पर दे रहा जो तकरीर है।

जिन्दगी में कभी सुनी नहीं उसने शहनाई है।।

जिनकी दीवार  पर  लाखों लाइक  हैं ।

दरो दीवार में घुटन ख़ालिस तन्हाई है ।।

यह तो पल पल की तस्वीरें साझा कर रहा है।

तू सिर्फ तमाशा ही नहीं गोया तमाशाई है।।

दोस्तों की फैरिस्त से चार कान्धें न पहुंचे घर।

मतलब के हैं दोस्त काग़जी तवानाई है।।

ख़्याब को हकीकत में चार दिन में करने निकले हैं।

अज़ब नौजवानों में  यहाँ शकेबाई है ।।

सोग-नशीं है  सारा शहर फोन के परदे पर।

मजमें लगते थे जहाँ आज तन्हा पस्पाई है।।

बर्बाद हो गये हो तो कुछ देर सोग मना लो राही

जो रूस्सा न करे ऐसी कौन सी यहाँ रूस्वाई है।।

डॉ. राकेश राही