दिल में उसके वास्ते अब कोई फ़ीलिंग नहीं
उसने सारी भी कहा लेकिन कोई मीनिंग नहीं।।
दिल नहीं दिल की जगह रक्खा है यारों ने दिमाग़
अब ताल्लुक़ में वफ़ादारी की कोई डीलिंग नहीं।।
सबने हीलिंग की दुकाने खोल रक्खी हैं यहाँ
ख़ुद के हैं जो ज़ख़्म उनकी तो कोई हीलिंग नहीं।।
ज़ेहन में सारी ख़ुराफ़ातों का होता है जनम
दिल में जो जज़्बात हैं इनमे कोई चीटिंग नहीं।।
मैं अमल से सिल रहा हूँ ज़िंदगी की चादरें
इससे बढ़कर तो कहीं पर भी कोई वीविंग नहीं।।
बेदरो दीवार के रहते हैं हम आराम से “राही”
दोस्तो ! आकाश के जैसी कोई सीलिंग नहीं।।
डॉ. राकेश ‘ राही ‘


