काश एक बच्चे को मज़हब मान ले हर इंसान,

इबादत हो पूरी देखकर बस उसकी मुस्कान

उसके दिल पाक में नफ़रत की कोई बात ना हो

उसकी नज़रों में कोई रंग कोई ज़ात ना हो