बाकी़ है, अब भी बाकी़ है,

तेरी हर याद अब भी बाकी़ है

दिल के एक कोने में दफ़न ही सही,

पर तुझसे जुड़ी हर बात अब भी बाकी़ है

हर लम्हा जो तेरे संग बिताया था,

हर ख़्वाब जो तेरे संग सजाया था

उन सब की कशिश आज भी वैसी ही बाकी़ है

तूने जितनी ख़ुशियाँ दीं

 उनका हर एहसास बाकी़ है

और जितने तूने ज़ख्म दिए

वो भी पायाब बाकी़ हैंं

तेरी चाहत ने जितने अरमान सजाए

तेरी झूठी बातों ने जितने ख़्वाब दिखाए

उन सबका बेइंतहा दर्द उतनी ही शिद्दत से 

टीस बन कर आज भी सीने में चुभता है

आज भी मेरे ज़हन में तेरी क़ाफ़िर आँखों का 

धोख़ा बेसाख़्ता उभरता है

जब भी कभी बेध्यानी में कागज़ पर कलम फि़राती हूँ

तेरा ही नाम बार बार अल्फ़ाज़ बन पन्ने पर उतरता है 

हर हरक़त तेरी, हर शरारत तेरी 

हर उल्फ़त तेरी , हर तिजारत तेरी

हर पल , हर लम्हा ज़हर बन कर चुभता है

सोचती हूँ ऐसा क्या था तुझमें 

कि आज भी मेरा मन तुझे भुला नहीं पाया

तूने रुसवा किया मुझे भरे ज़माने में

फिर भी तुझसे नफ़रत ये दिल कर नहीं पाया

जितनी शिद्दत से मैंने तुझसे मोहब्बत की थी

उतनी ही बेरूख़ी से तूने मेरा हर अरमान जलाया

हर रोज़ मैं तुझको बद्दुआएँँ देती हूँ

पर कमबख़्त मेरा ये दिल कभी आमीन कह ही नहीं पाया

आज मेरे दिल की ये तमाम बातें सुनकर

 तुम ग़लती से भी ख़ुश मत होना

मैं भूली नहीं हूँ सब कुछ

ये देख कर तुम कोई उम्मीद भी मत रखना

क्योंकि मेरे माज़ी का तुम वो हिस्सा हो

जिसे मैं कभी भूलना ही नहीं चाहती

मेरी एक ऐसी ग़लती हो जिसे मैं कभी दोहराना नहीं चाहती

इसलिए तू और तेरी हर याद 

मेरी क़ज़ा तक मेरे हर दिन की सज़ा है

मगर फिर भी आज मैं इतना सब होने के बावजूद

 अपनी ज़िंदगी में ख़ुश रहती हूँ

हर नये दिन का आग़ाज़ अपने हर पल कामयाब होने के जज़्बे से करती हूँ

क्योंकि मेरी पाकी़ज़ा मोहब्बत और मेरे ऐतबार का मेरे ख़ुदा ने ऐहतेराम रखा है

मेरे दिल को धड़कने की, मुझे साँस लेने की वजह दी

मेरे होने को मकसद दिया और मेरी जि़ंंदगी को आबाद रखा है।