दोस्ती कर ली है मैंने भी " कुदरत"से,
अब मेरी रचनाओं में उसका भी जिक्र होगा,
मेरे शब्दों से बढ़ेगी उसकी सुंदरता,
और मेरे भावों में उसका वजूद होगा,
वो बुला रही है मुझे बाहें फैलाकर,
मैं मुस्कुरा रही हूँ, इतरा रही हूँ,
जैसे मिलवाया है जिंदगी को अपनी शख्सियत से,
वैसे अब इसे भी मिलवा रही हूँ !!


