मैं इंसान नहीं हूँ...


मैं इंसान नहीं हूँ,

अब मेरा खून नहीं खौलता।


बहनें पीड़ित हैं, हवस की मंडी हैं।

बच्चे बेघर - लाचार हैं, भूख का व्योपार हैं।

कुल्हाड़ी की नोंकपर दरख़्तों का कारोबार हैं।

वायु, जल और विचारों में

फैला विषप्रभाव हैं।

मासूमों को कत्ल करनेवालों की जयजयकार हैं।

मैं कहीं मौन हूँ, निस्तब्ध और निश्चल...


मैं इंसान नहीं हूँ,

अब मेरा खून नहीं खौलता।


©ऋषि